यूरोप में महंगाई के खिलाफ लोग सड़कों पर उतरने लगे हैं। खासतौर पर इटली और फ्रांस में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हो रहे हैं। इस दौरान हिंसा और आगजनी की भी खबरें है। प्रदर्शनकारियों ने दुकानों में लूटपाट की, वाहनों और अन्य संपत्तियों में आग लगा दी। हालात काबू करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने और वाटर कैनन का इस्तेमाल करना पड़ा। फ्रांस में पुलिस ने कम से कम 272 लोगों को गिरफ्तार किया जबकि इटली के मिलान में करीब 50 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया।
दुकानों में लूटपाट और आगजनी
इटली के मिलान के मध्य हिस्से में शनिवार को दंगाइयों ने पुलिस से झड़प के बाद दुकानों में लूटपाट की और संपत्तियों में आग लगा दी। हिंसा के कारण पियाजा डेल डुओमो चौक और महंगी वस्तुओं की दुकानों वाला एक बाजार खाली हो गया, जहां आमतौर पर बड़ी संख्या में खरीदारी करने वाले लोग मौजूद रहते हैं। अलग-अलग जगहों पर युद्ध और बढ़ती महंगाई के खिलाफ निकाला गया मार्च शांतिपूर्ण तरीके से शुरू हुआ था लेकिन बाद में नकाब पहने प्रदर्शनकारियों ने दंगा नियंत्रण पुलिस पर पत्थर और अन्य चीजें फेंकीं। घटना के बाद सामने आईं तस्वीरों में काराबिनिएरी पुलिस की एक गाड़ी बुरी तरह क्षतिग्रस्त दिखाई दी। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने पानी की बौछार करने वाली गाड़ियों और आंसू गैस का इस्तेमाल किया।
दो पुलिस अधिकारी घायल
समाचार एजेंसी 'लाप्रेस' की खबर के अनुसार, कम से कम दो पुलिस अधिकारी घायल हुए और कई नाबालिगों समेत करीब 50 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने हिंसा की निंदा की। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि प्रदर्शन करना अधिकार है, लेकिन शहरों को आग के हवाले करना नहीं। उन्होंने लिखा, "प्रदर्शन करना एक अधिकार है। अपने शहरों में आग लगाना नहीं।" उन्होंने उन "उपद्रवियों" का जिक्र किया, जो प्रदर्शनों का फायदा उठाकर अराजकता फैलाते हैं, सुरक्षा सुनिश्चित करने वालों पर हमला करते हैं और पूरे शहरों को बंधक बना लेते हैं। मिलान के मेयर ग्यूसेप्पे सेला ने कहा, "कानून लागू करने वाले सुरक्षाकर्मियों के खिलाफ हिंसा और शहर को भारी नुकसान पहुंचाना उचित नहीं है।"
फ्रांस के कई शहरों में हिंसा और आगजनी
फ्रांस में भी बढ़ती महंगाई को लेकर बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए। इस दौरान हिंसा की घटनाएं भी हुईं। राजधानी पेरिस में कारों में आग लगाई गई और दुकानों में लूटपाट हुई। पुलिस ने नकाबपोश प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। देशभर में कम से कम 272 लोगों को गिरफ्तार किया गया।
फ्रांस के गृह मंत्री लॉरां नुनेज के कार्यालय के मुताबिक, देश के कई हिस्सों में पुलिसकर्मियों पर हमले, लूटपाट और सार्वजनिक इमारतों को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं सामने आईं। ल्योन में एक टूरिज्म दफ्तर के अंदर आग लग गई, जबकि मार्सिले में दुकानों और नगरपालिका पुलिस स्टेशन को नुकसान पहुंचाया गया। कुछ प्रदर्शनकारी शहर के सिटी हॉल की लॉबी में भी घुस गए।
2018 के 'येलो वेस्ट' आंदोलन की वापसी के संकेत
फ्रांस में प्रदर्शनकारियों ने सोशल मीडिया के जरिए 2018 के 'येलो वेस्ट' आंदोलन को फिर से सक्रिय करने की अपील की। उस आंदोलन की शुरुआत सामाजिक असमानता और महंगाई के खिलाफ हुई थी। इस बार भी पेट्रोल, ऊर्जा और खाद्य पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी से लोगों में नाराजगी देखी गई।
बता दें कि इससे पहले फ्रांस में 2 अक्तूबर को स्टूडेंट्स का प्रोटेस्ट हिंसक हो गया था। स्कूलों के लाखों स्टूडेंट सरकार के खिलाफ प्रोटेस्ट करने सड़कों पर उतरे थे। कई जगहों पर आगजनी की गई। स्कूल के गेटों पर ताला लगा दिया। जगह-जगह तोड़फोड़ की गई। सरकार के खिलाफ नारे लगाए गए। फ्रांस की पुलिस से कई जगहों पर इनकी झड़प हुई। पुलिस को टियर गैस छोड़नी पड़ी, लाठीचार्ज करना पड़ा। इस दौरान 2000 से ज्यादा स्टूडेंट्स को अरेस्ट किया गया था।
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